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राखी बांधने के बाद क्या हुई खान सर की साथ आईए जानते हैं विस्तार से |
राखी बांधने के बाद क्या हुई खान सर की साथ आईए जानते हैं विस्तार से
इस रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पटना के सबसे लोकप्रिय शिक्षक खान सर की भी खूब चर्चा हो रही है। क्यूंकि रखी की पबन मोको पर उन्हें हजारों लड़कियां राखी बांधने आती हैं। और इतनी अधिक संख्या में लड़कियां उनकी हाथ पर राखी बांधती हैं कि उनकी पूरी बांह भर जाती है। जो आपको फोटो में भी नजर आ रहा होगा।
क्या हुए खान सर को राखी बांधने के बाद
हर साल की तरह इस बार भी खान सर को हजारों लड़कियों ने राखी बांधी है। खान सर ने बताया कि राखी की संख्या इतनी अधिक थी कि उनके हाथ के ब्लड सर्कुलेशन में भी परेशानी महसूस होना होने लगी।
हर साल की तरह इस साल भी पटना के खान सर ने हजारों लड़कियों से राखी बंधवाई है। लेकिन आप लोग जानकर चौंक जाओगे उन्हें इतना लड़कियों ने राखी बांदा।
बताया जहा रहा है कि करीब 5 हजार लड़कियों ने उन्हें राखी बांधी है। राखी के पबन अवसर पर पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था खान सर की दौरा, जहाँ करीब 5 हजार लड़कियां पहुंची थीं उन्हें राखी बांधने।इसी से पता चलता है कैंसर का लोकप्रियता,
खान सर अपनी सभों छात्राओं को बहन के रूप में मानते हैं, इन्हीं बहनों से राखी बंधवाकर उनका आशीर्वाद लिया और सब को उपहार भी प्रदान किया।
कार्यक्रम में खान सर की ओर से सभी लड़कियों के लिए विशेष भोजन की भव्य व्यवस्था की गई थी। जिसमे 156 प्रकार के व्यंजन बनाए गए था। स्वादिष्ट पकवानों के बीच भाई-बहन के रिश्ते का यह भावनात्मक मिलन और भी खास हो गया। खान सर से सभी को सिख लेना चाहिए। खान सर के इस आयोजन ने केवल भाई-बहन के अटूट रिश्ते को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक सद्भाव और अपनत्व का सुंदर संदेश भी दिया समाज को। ताकि सभी को पता चले आज के समय में ऐसा भी होता है।
मीडिया से बातचीत करते हुए खान सर ने कहा कि उनके हाथ में इतनी राखी बांधी गई है कि उनका ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछ लड़कियों ने इतना कसकर राखी बांध दी थी कि उससे थोड़ी परेशानी हुई है। खान सर ने कहा कि बहुत दूर दूर से और हर राज्य से लड़कियां यहां आई हैं उन्हें राखी बांधने।
खान सर ने बताया कि सभी लड़कियों से यही कहना चाहता हूं कि भारत का गौरव है रक्षा बंधन का त्योहार। हम सभी की अपनी संस्कृति को बचाकर रखने की नैतिक जिम्मेदारी है। हम भाग्यशाली हैं कि इस कलयुग में भी लाखों लड़कियों का प्रेम मिला है। यह सौभाग्य शायद इस पृथ्वी पर मुझे ही मिला है। मैं अपनी क्लास में लड़कियों को बहन मानकर पढ़ाता हूं।